बुधवार, 12 अक्तूबर 2016

दोगली देशी कुकुरिया अऊर बिलाइती बोल- 2


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कलास से तो निकल कर आ गए लेकिन खोपड़िया भारी हो गया था अऊर मर्चा लगा था तो भभा भी रहा था अब का बताएं कि का भभा रहा था। जाकर स्टाफरूम में बइठ गया अऊर एक बोतल पानी लेकर पिया लेकिन जो जर रहा था ऊ कइसे बूताता।एक देवी जी आईं अऊर बोलीं हमसे " Anurag Sir, what was happening in your class today? There was too much of noise in your class. Kids were shouting in your class."

अब हम का बताते उनको कि गए थे बचवन को secularism पढ़ाने लेकिन बचवा कुल हमहीं को पढ़ाने लगे। तो मैडम को हम बोले ' Maam I was teaching them secularism and it turned into a very healthy debate which I enjoyed with them' अब हम उनको का बताते कि मैडम गोला दागा जा रहा था हमरे ऊपर अऊर हम चोट खा रहे थे अऊर अपने चोट को छुपा कर हेल्दी बता रहे थे लेकिन जरूरत तो हल्दी की थी। दिमाग का दही हो गया था अऊर कइसे करके दिन बीत गया। अगले दिन पहुँचा स्कूल तो तीसरा अऊर चौथा घंटा ग्यारहवीं में था। पिछला रोज तो एक ही पीरियड था तो हालत एतना पतील हो गई अब तो दू पीरियड में तो आईसीयू का नौबत आ जाएगा। हम कलास में पहुँचे तो बच्चा लोग खड़ा होकर हमको बड़ा टोन में good morning विश किया तो हमको समझ में आ गया कि जब breakfast अइसा है तो lunch का स्वाद कैसा होगा। खैर हम भी महटियाते हुए उनको good morning कहा और आगे बोला ' Which topic we have to do today?'

तबले कलऊतिया खड़ी हुई अऊर धीरे से मुसकियाते हुए बोली ' गुरुदेव कल वाली कहनिया जवन शुरू किए थे ऊ तो अधूरिए रह गई थी। धनियवा उस कहनिया में मसाला डाल रही थी तबले घंटा बज गया अऊर आप टसक लिए थे। आज कहनिया पूरा होगा ओकरे से आगे।' फिर कलऊतिया धनियवा की तरफ घूमते हुए बोली ' करे धनियवा कल का कह रही थी Indian Secularism के बारे में? अब ओकरा से आगे बढ़।'

कलऊतिया एतना कहकर बइठ गई अऊर धनियवा खड़ी होकर बोलने लगी'  गुरुदेव कल हम इहे कह रहे थे कि  Indian Secularism ईसाईयत से ही संबंधित है अऊर इ कुल सेकुलर दोगलवा कुल 'सेकुलरिज्म-सेकुलरिज्म' भौंकता है, ई कुलहिनवा को अपने देश के संस्कृति अऊर सभ्यता में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का भाव नहीं देखाता है। अरे गुरुदेव सबसे पहिला बात कि ऊँहा religion जिसको कहते हैं ऊ invented concept है गुरुजी, अऊर हमरे इहाँ religion नाम का कुछ हईए नहीं है। अपने इहाँ तो धर्म है जो invented नहीं evolutionary concept है तब equality among all the religion दोगलई नहीं तो का है? धर्म संस्कृत के 'धृ' धातु से बना है जिसका अर्थ होता है ' जो सबको बनाये रखे'। धर्म आध्यात्मिक, नैतिक एवं प्राकृतिक सिद्धांतों से सम्बंधित जिससे इस ब्रम्हांड का अस्तित्व है। धर्म को हमेशा वेद या विद्या से सम्बंधित देखा गया है जिसका तात्पर्य उस आतंरिक क्षमता से है जिससे इस ब्रम्हांड की प्रकृति को समझा जा सके। अब इसके आगे हम कुछहू कहेंगे तो आप कहने लगेंगे कि हम आपका अपमान कर रहे हैं और ज्ञान बूंक रहे हैं। गुरूजी इस ब्रम्हांड में कार्य कर रहे प्रत्येक चीज का एक प्राकृतिक नियम है, चाहे वह प्रकृति की शक्तियां या बल हों, पृथ्वी के पंचतत्व हों चाहे, चाहें भूलोक,अंतर्लोक एवं ब्रम्हलोक के रूप में त्रिलोक हो और यही नियम धर्म कहलाते हैं। हर जीव में एक प्रकार का अद्वितीय गुण या ऊर्जा होती है जो उसके अस्तित्व को निर्धारित करती है। हर एक वस्तु का अपना स्थान है जो उसके स्थान को इस लोक में निर्धारित और परिभाषित करता है और मानव जाति के लिए इस पृथ्वी पर एक विशेष दायित्व या धर्म निर्धारित किया गया है और वह धर्म है कि वह सत्य को पहचानने के साथ-साथ उच्च चेतना की प्राप्ति के लिए प्रयास करे और सहायक हो। मानव जीवन और संस्कृति के प्रत्येक एवं सभी पहलू के लिए यहाँ धर्म या कहें नियम निर्धारित हैं : जैसे कला का धर्म है, व्यापार का धर्म है, भाषा एवं संचार का धर्म है, रिश्तों का धर्म है, और यहाँ तक कि जिसे आप religion कहते हैं उसका भी एक धर्म है और बहुत कुछ ऐसा है जिसका धर्म है।
Each different domain of our lives has certain principles and practices necessary to unfold its full potential, which constitute its dharma.  If we follow the dharma in what we do, we will not only be successful, but will act so in a way that promotes the well-being of all. The universe  is an organically connected vibratory field in which all things  are linked together  into a greater network of harmony, beauty and vitality. This is the universal ‘web of dharma'. We have our own individual or 'svadharma'   that reflects our capacities and aspiration in life. Yet this is not something that divides us from others.Each person has similar potentials that we must honour.
अउर गुरूजी जहाँ तक हमारे धर्म में ईश्वर की परिकल्पना का सवाल है तो गुरुदेव तनि सा आप रिसर्च कीजिये अउर अपना ज्ञान बढ़ाइए। इ जो सेकुलरिजम- सेक्युलरिज़म का पिपिहरी बजा रहे हैं उसको बंद कीजिये। ससुरा पता नहीं हमरे देशवा में कवन रोग लगा है कि आपन चिजीया अपने आदमी कहे त फ़ालतू लगै ले अउर उहे बतिया केहू बहरी का आदमी कहे तो गर्व होने लगता है। अउर इ जो सेकुलरिज्म है इ पूरा तरीके से पाश्चात्य अवधारणा है। कहने को तो इंग्लैंड , फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका इत्यादि में आपके तथाकथित रिलिजन को सार्वजनिक जीवन का अंग माना  ही नहीं है तो इक्वलिटी ऑफ़ रिलिजन तो ढकोसला है न ?  जबकि अपने इहाँ धर्म का व्यक्तिगत अउर सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका रहा है अउर है। दुन्हू रूप में दुन्नो एक दूसरे के पूरक हैं। खैर गुरूजी आपको हमरा बतिया नहीं बुझाएगा काहे कि आपके ऊपर तो सेकुलरिज्म का ललका और हरियरका रंग चढ़ा है। आप छोड़िए अब इस बहस को अगला पॉइंटवा किसी से बंचवाइए और उसका व्याख्या कीजिये। हमरा भी मुँह बोलते-बोलते पिराने लगा है अउर आपके कपारे का जूँ नहीं रंगेगा। हरे मंगरुआ ! खड़ा होकर अगला वाल पॉइंट्वा पढ़ दे "

एतना कहकर धनियवा तो बइठ गयी लेकिन हमरे कनवा से धुआँ निकलने लगा अउर आज तो कलिहों से ढेर भभा रहा था हमारा। लईका-लईकी कुल हमरे थोबड़ा को देखके धीरे-धीरे मुस्किया रहा था अउर आपसे में खुसुर-फुसुर कर रहा था।  पारा तो हमरा इतना ऊपर चढ़ गया था कि मन कर रहा था कि कउनो को घिसिराके कांड़ दें लेकिन हम बात को आगे नहीं बढ़ाना चाह  रहे थे लेकिन मेरे लिए आगे एक पीरियड और झेलना बहुत भारी हो रहा था।  इसलिए हम  मंगरुआ को इशारा किये की खड़ा होकर अगला वाला पॉइंट पढ़ दे। मंगरुआ धीरे-धीरे मुस्कियाते और कनखिया कर देखते हुए खड़ा हुआ जइसे हमसे कह रहा हो ' गुरु जी अगले वाला मर्चवा इससे बवाल आने वाला है।' खैर मंगरुआ खड़ा हुआ और पढ़ने लगा " A third accusation against secularism is the charge of minoritism."

एतना पढ़कर मंगरुआ बइठ गया अउर हम ब्लैक-बोर्ड के तरफ जाकर तीसरा पॉइंट लिख दिए अउर जइसे आगे तरफ मुँह घुमाए व्याख्या के लिए वइसहीं विद्यालय का चपरासी आया अउर बोला " सर कोई पैरेंट आये हैं और आपको प्रिंसिपल मैम बुला रही हैं। " हमभी थोड़ा सा निश्चिंत हुए कि आजका बाकी टाइम तो निकल जाएगा मीटिंग में तो एक राहत की साँस लेते हुए बोले " O.K children we will continue in the next class. Thanks for today . इतना कहकर हम धीरे से किताब उठाये और क्लास के बहार टसक लिए तो जान में जान आई हमरे। 

                                                                            बेबाक बनारसी

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